हल्द्वानी में युवा और बच्चों में हृदय रोग के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने तनाव, जंक फूड, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी को प्रमुख जोखिम कारकों में बताया है।
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हल्द्वानी में बढ़ रहे कम उम्र के हृदय रोगी, 40 से कम उम्र के करीब 15% मरीज
दिल की बीमारी ने बदली तस्वीर, 40 की उम्र से पहले ही सामने आ रहे हृदय रोग के मामले
हल्द्वानी: कभी हृदय रोग को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन बदलती जीवनशैली के बीच अब युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हल्द्वानी में हृदय रोग से पीड़ित बच्चों और कम उम्र के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी सामने आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव, असंतुलित खानपान, जंक फूड, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी
हल्द्वानी के सरकारी अस्पतालों में फिलहाल पर्याप्त कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं और एंजियोप्लास्टी की सुविधा भी सीमित है। सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्थापित कैथ लैब भी हार्ट दिवस के मौके पर सुचारु रूप से संचालित नहीं हो सकी। ऐसे में कम उम्र के हृदय रोगियों के उपचार को लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
40 साल से कम उम्र के करीब 15 फीसदी मरीज
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव यादव के अनुसार अब कुल हृदय रोगियों में करीब 15 फीसदी मरीज 40 वर्ष से कम उम्र के हैं। उनके पास रोजाना एक वर्ष से कम उम्र से लेकर 17 वर्ष तक के करीब 25 बच्चे हृदय संबंधी बीमारी के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश पंत के अनुसार कम उम्र में होने वाली अचानक मौत के पीछे सडन कार्डियक अरेस्ट के साथ ही हृदय की मांसपेशियों में सिकुड़न और जन्मजात हृदय संबंधी विकार भी कारण हो सकते हैं। उनके पास प्रतिदिन करीब 40 बच्चे हृदय संबंधी बीमारी की जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
बच्चों में इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों ने अभिभावकों से बच्चों में बार-बार होंठ, जीभ, नाखून या शरीर के किसी हिस्से में नीलापन, सांस फूलना, जल्दी थकना अथवा दौड़ने-खेलने के दौरान असामान्य परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की है।
दो-तीन साल में 35 बच्चों की ओपन हार्ट सर्जरी
हृदय एवं वक्ष सर्जन डॉ. विकास सिंह ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में वह करीब 35 बच्चों की ओपन हार्ट सर्जरी कर चुके हैं। कुछ बच्चों में हृदय संबंधी बीमारी जन्मजात होती है, जबकि कई मामलों में इसके लक्षण बाद में सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि कोविड के बाद रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ने की बात सामने आई है, जिसका हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधि करने, अनियंत्रित रक्तचाप को नियंत्रित रखने और समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने की सलाह दी।
बदलती जीवनशैली बन रही हृदय रोग का जोखिम
बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में भी हृदय संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधांशु सिंह के अनुसार तनावपूर्ण जीवनशैली, जंक फूड, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और व्यायाम की कमी के कारण अब कम उम्र के लोग भी हृदय रोगों की चपेट में आ रहे हैं।
डॉ. सुधांशु सिंह के अनुसार हृदय रोग से बचाव के लिए जोखिम कारकों की समय रहते पहचान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। हार्ट अटैक के मामलों में गोल्डन ऑवर सबसे महत्वपूर्ण होता है। मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने और तत्काल थ्रोम्बोलाइसिस शुरू करने से जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। चिकित्सकों के अनुसार समय पर उपचार मिलने से अब तक करीब 90 हार्ट अटैक पीड़ितों की जान बचाई जा चुकी है।
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