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18 साल की उम्र में फांसी! शहीद खुदीराम बोस की पूरी कहानी, 118वीं पुण्यतिथि पर देश कर रहा नमन

आज 11 August 2026 को देश महान freedom fighter और revolutionary Khudiram Bose की 118th Death Anniversary पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। खुदीराम बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन युवा क्रांतिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने बेहद कम उम्र में British Government के खिलाफ संघर्ष किया और देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

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आज 11 August 2026 को देश महान Freedom Fighter और Revolutionary Khudiram Bose की 118th Death Anniversary पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। खुदीराम बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन युवा क्रांतिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने बेहद कम उम्र में British Government के खिलाफ संघर्ष किया और देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

Khudiram Bose कौन थे?

Khudiram Bose Biography और History की बात करें तो उनका जन्म 3 December 1889 को Bengal के Midnapore इलाके में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता के निधन के बाद उनका पालन-पोषण उनकी बड़ी बहन ने किया।

किशोरावस्था में ही उनके अंदर British Rule के खिलाफ विरोध और देशभक्ति की भावना विकसित हो गई थी। बेहद कम उम्र में ही वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय हो गए।

 

 

1908 में Muzaffarpur Bomb Case से जुड़े खुदीराम बोस

साल 1908 में Khudiram Bose और Praful Chaki को Muzaffarpur के जिला मजिस्ट्रेट Douglas Kingsford को निशाना बनाने की जिम्मेदारी दी गई।

30 April 1908 की रात हुई bombing की घटना में पहचान की गलती के कारण Kingsford की जगह दूसरी बग्घी निशाना बन गई। इस घटना में दो ब्रिटिश महिलाओं की मौत हो गई।

यह घटना आगे चलकर Muzaffarpur Bomb Case के नाम से चर्चित हुई और इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी।

Praful Chaki शहीद हुए, Khudiram Bose गिरफ्तार

हमले के बाद British Police ने खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी की तलाश शुरू कर दी।

पुलिस से घिरने के बाद Praful Chaki ने खुद को गोली मार ली और शहीद हो गए, जबकि Khudiram Bose को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया और उन्हें Death Sentence यानी मौत की सजा सुनाई गई।

18 साल की उम्र में दी गई फांसी

11 August 1908 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में हमेशा याद किया जाने वाला दिन बन गया।

इसी दिन Muzaffarpur Jail में महज 18 साल की उम्र में Khudiram Bose को फांसी दे दी गई।

इतनी कम उम्र में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले खुदीराम बोस का नाम भारतीय इतिहास में साहस, देशभक्ति और बलिदान की मिसाल बन गया।

Khudiram Bose की शहादत ने युवाओं को किया प्रेरित

खुदीराम बोस की शहादत की खबर जब देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंची तो लोगों के बीच उनके प्रति गहरा सम्मान देखने को मिला।

एक बेहद युवा क्रांतिकारी का British Rule के सामने डटकर खड़ा होना उस दौर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया। उनकी कहानी ने स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं की भूमिका और उनके संघर्ष को नई पहचान दी।

Khudiram Bose 118th Death Anniversary 2026

आज 11 August 2026 को खुदीराम बोस की शहादत के 118 वर्ष पूरे हो गए हैं।

इस मौके पर देश उनके साहस, बलिदान और Patriotism को याद कर रहा है। खुदीराम बोस की कहानी केवल एक Freedom Fighter की कहानी नहीं है, बल्कि उस दौर के उन भारतीय युवाओं की कहानी है, जिन्होंने British Rule के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपनी जिंदगी तक कुर्बान कर दी।


शहीद खुदीराम बोस को शत-शत नमन

देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले महान क्रांतिकारी शहीद खुदीराम बोस को शत-शत नमन।

उनका साहस और बलिदान भारतीय इतिहास में हमेशा याद किया जाता रहेगा।

खुदीराम बोस का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का वह अध्याय है, जिसे देश हमेशा श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करता रहेगा।

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News Desk Lucknow

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