Article Body
Lucknow Rapido Case: जातिगत टिप्पणी विवाद के बाद ड्राइवर का 99 साल 11 महीने Suspension का दावा
lucknow rapido news: जातिगत टिप्पणी के विवाद के बाद ड्राइवर का अकाउंट 99 साल 11 महीने के लिए सस्पेंड होने का दावा
lucknow news: लखनऊ में Rapido कैब राइड के दौरान यात्रियों और ड्राइवर के बीच हुए विवाद ने जातिगत टिप्पणी, कैब ड्राइवरों की आजीविका और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। 30 वर्षीय कैब ड्राइवर अंकित कुमार का दावा है कि यात्रियों के साथ विवाद के बाद Rapido ने उनका ड्राइवर अकाउंट 99 साल 11 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया।
अंकित के मुताबिक, उन्होंने कैब में कथित जातिगत टिप्पणियों का विरोध किया था और यात्रियों को उतरने के लिए कहा था। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों में यात्रियों की ओर से ड्राइवर पर भी अनुचित व्यवहार के आरोप सामने आए हैं। ऐसे में पूरे घटनाक्रम में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
महत्वपूर्ण: इस खबर में बताए गए आरोप संबंधित पक्षों के दावों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। यात्रियों का विस्तृत पक्ष और Rapido की आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया इस समय सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लखनऊ के PGI क्षेत्र में रहने वाले अंकित कुमार कैब ड्राइविंग का काम करते हैं। उनके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा है। अंकित का कहना है कि कैब चलाना उनके परिवार की आय का महत्वपूर्ण जरिया है।
बताया गया कि घटना उस समय हुई जब अंकित चार यात्रियों को उतरठिया रेलवे स्टेशन से चारबाग रेलवे स्टेशन ले जा रहे थे। यात्रियों को रेलवे से जुड़े कर्मचारी बताया गया है।
अंकित के अनुसार, यात्रा के दौरान यात्रियों के बीच एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी को लेकर बातचीत हो रही थी। उनका आरोप है कि बातचीत आगे बढ़ने पर अधिकारी की जाति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
ड्राइवर का कहना है कि उन्होंने यात्रियों से ऐसी टिप्पणियां रोकने के लिए कहा और व्यक्ति की क्षमता को उसकी जाति से जोड़ने पर आपत्ति जताई।
तेलीबाग के पास कैब रोककर यात्रियों को उतरने को कहा
अंकित के मुताबिक, जब कथित टिप्पणियां जारी रहीं तो उन्होंने तेलीबाग मार्केट के पास एक पुलिस चौकी के नजदीक कैब रोक दी और यात्रियों से वाहन से उतरने के लिए कहा।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। घटना का एक वीडियो भी सामने आया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, वीडियो में ड्राइवर यात्रियों की कथित जातिगत टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए दिखाई देते हैं।
हालांकि, यात्रियों की ओर से इस घटनाक्रम को लेकर अलग आरोप भी सामने आए हैं। इसलिए वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही घटना की पूरी तस्वीर तय करना उचित नहीं होगा।
99 साल 11 महीने के Suspension का दावा
विवाद के बाद अंकित का दावा है कि यात्रियों की शिकायत पर Rapido ने उनका ड्राइवर अकाउंट 99 साल 11 महीने के लिए suspend कर दिया।
अंकित ने कथित तौर पर कंपनी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका पक्ष सुने बिना ही अकाउंट पर कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि कैब ड्राइविंग उनकी आजीविका का जरिया है और अकाउंट बंद होने से उनकी कमाई प्रभावित हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, Rapido की ओर से इस मामले में अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ड्राइवर ने बताया आजीविका पर असर
अंकित के मुताबिक, वह अपने परिवार के प्रमुख कमाने वाले सदस्य हैं। उनके पिता मजदूरी करते हैं और मां गृहिणी हैं। ऐसे में लंबे समय के लिए प्लेटफॉर्म से प्रतिबंधित किया जाना उनके लिए सिर्फ एक ऑनलाइन अकाउंट से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि रोजगार से जुड़ा मुद्दा भी है।
उन्होंने यह भी दावा किया है कि घटना का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर अपमानजनक और धमकी भरे संदेश मिले।
मामले ने उठाए कई बड़े सवाल
लखनऊ का यह विवाद अब सिर्फ एक कैब राइड तक सीमित नहीं रह गया है। इसने gig workers, ऑनलाइन कैब प्लेटफॉर्म और शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
सबसे अहम सवाल यह है कि किसी विवाद की स्थिति में प्लेटफॉर्म द्वारा कार्रवाई करते समय यात्री और ड्राइवर दोनों पक्षों को सुनने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होनी चाहिए?
दूसरी ओर, यदि किसी ड्राइवर पर यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार या कंपनी की शर्तों के उल्लंघन का आरोप है, तो प्लेटफॉर्म को अपनी नीतियों के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार भी हो सकता है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष सभी पक्षों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही निकाला जा सकता है।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग ड्राइवर के कथित जातिगत टिप्पणी के विरोध को मुद्दा बना रहे हैं, जबकि कुछ प्रतिक्रियाओं में यात्रियों के साथ ड्राइवर के व्यवहार और उन्हें कैब से उतारने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ऐसे मामलों में वायरल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे घटनाक्रम और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों का इंतजार करना महत्वपूर्ण है।
अब Rapido के जवाब पर नजर
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल Rapido की कार्रवाई को लेकर है। क्या 99 साल 11 महीने का suspension कंपनी की वास्तविक नीति के तहत लगाया गया है, इसकी परिस्थितियां क्या थीं और क्या ड्राइवर की अपील या पुनर्विचार की कोई प्रक्रिया उपलब्ध है—इन सवालों पर कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया से स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।
साथ ही, यात्रियों का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद विवाद के दूसरे पहलू को समझने में भी मदद मिलेगी।

Comments