293 करोड़ के सुरक्षा कार्य से मिली राहत, आसपास के भूस्खलन ने बढ़ाई चिंता
नैनीताल: बलियानाला में करीब 293 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे सुरक्षा कार्यों से कृष्णापुर समेत आसपास के क्षेत्रों के लोगों को राहत मिली है। हालांकि, इस मानसून में समीपवर्ती पहाड़ियों पर लगातार हो रहे भूस्खलन और बोल्डर गिरने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि संवेदनशील पहाड़ियों का विशेषज्ञों से स्थलीय निरीक्षण कराकर स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाने जरूरी हैं।
सुरक्षा कार्यों से कई इलाकों को राहत
बलियानाला क्षेत्र में पिछले तीन-चार वर्षों से सुरक्षा कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों से हरिनगर, सिपाहीधारा, गुफा महादेव तथा मल्ला और तल्ला कृष्णापुर के लोगों को राहत मिली है। हालांकि, इस मानसून में आसपास के तीन-चार स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं ने क्षेत्र की संवेदनशीलता की ओर फिर ध्यान खींचा है।
सिपाहीधारा से कैलाखान तक भूस्खलन की घटनाएं
सिपाहीधारा क्षेत्र में बोल्डर गिरने और कई स्थानों पर भूस्खलन से लोगों में भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है। कैलाखान और आलूखेत की पहाड़ी पर भी भूस्खलन हुआ। नैनीताल-भवाली मार्ग पर टूटे पहाड़ से मलबा और भूस्खलन की स्थिति बनी रही। वहीं, दुर्गापुर नर्सरी के पास हुए भूस्खलन से मजदूरों के अस्थायी टिनशेड क्षतिग्रस्त हो गए।
सिपाहीधारा-वीरभट्टी मार्ग की पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से एक कार और दो दोपहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए। पहाड़ी पर फिलहाल तात्कालिक सुरक्षा कार्य किए गए हैं, लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
2.2 किलोमीटर फॉल को चैनलाइज करने का दिया गया था सुझाव
पूर्व पालिका उपाध्यक्ष डीएन भट्ट के अनुसार, वर्ष 1975 में विशेषज्ञ समिति ने 22 नंबर नाले से वीरभट्टी तक करीब 2.2 किलोमीटर फॉल को चैनलाइज करने का सुझाव दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के प्रयासों से इसके लिए 95 लाख रुपये स्वीकृत हुए। यह कार्य वर्ष 2003 में शुरू हुआ, लेकिन करीब 30 वर्ष की देरी के बाद यह व्यवस्था भी ढह गई।
भट्ट का कहना है कि बलियानाला का पानी समीपवर्ती पहाड़ी के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। ऐसे में विशेषज्ञों के माध्यम से बलियानाले के जल प्रवाह के साथ ही उससे लगी पहाड़ियों की विस्तृत जांच कराकर सुरक्षा की ठोस पहल किए जाने की जरूरत है।
संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा पर जोर
पूर्व पालिका सभासद कैलाश रौतेला ने कहा कि इस वर्ष कैलाखान और आलूखेत की पहाड़ी से भूस्खलन हुआ है। दुर्गापुर नर्सरी क्षेत्र में भी नुकसान हुआ। शहर और कृष्णापुर की सुरक्षा के लिए इन संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को गंभीरता से लेना होगा।
पालिका सभासद सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इस मानसून में मल्ला कृष्णापुर मार्ग, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के समीप की जमीन और लालकोठी के पास भी भू-कटाव हुआ है। उनके अनुसार ये क्षेत्र पहले से संवेदनशील हैं और आवासीय इलाकों की सुरक्षा को देखते हुए यहां प्रभावी सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।
तात्कालिक सुरक्षा कार्य हुए, स्थायी समाधान की मांग
कारोबारी दिनेश जोशी ने बताया कि हाल ही में सिपाहीधारा-वीरभट्टी लिंक मार्ग की संवेदनशील पहाड़ी से बड़ा बोल्डर नीचे गिरा था। सिंचाई विभाग की ओर से करीब पांच लाख रुपये की लागत से तात्कालिक सुरक्षा कार्य किए गए हैं, जबकि करीब 32 लाख रुपये का प्रस्ताव लंबित है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी की स्थायी सुरक्षा जरूरी है, अन्यथा भविष्य में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।