9 करोड़ के इंजेक्शन के लिए मां की गुहार, जामा मस्जिद में उमड़ा मदद का सैलाब
नई दिल्ली: दिल्ली के एम्स अस्पताल के बाहर अपनी मासूम बेटी के इलाज के लिए मदद की गुहार लगा रही एक मां की पीड़ा ने लोगों को झकझोर दिया। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 से जूझ रही बच्ची के इलाज के लिए करीब 9 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले इंजेक्शन की जरूरत बताई गई है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना चुनौतीपूर्ण था। इसी बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने बच्ची की मदद के लिए अभियान शुरू किया, जो देखते ही देखते बड़े जनसहयोग में बदल गया।
एम्स के बाहर से शुरू हुई मदद की मुहिम
अभियान की शुरुआत दिल्ली एम्स के बाहर से हुई। इन्फ्लुएंसर खलीफा और उनके साथियों की नजर अस्पताल के बाहर बैठी बच्ची की मां पर पड़ी। बच्ची की बीमारी और इलाज के लिए आवश्यक रकम की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने लोगों से मदद की अपील शुरू की। सोशल मीडिया के माध्यम से भी बच्ची की कहानी लोगों तक पहुंचाई गई।
पानी पीने के लिए भी दूसरों की मदद की जरूरत
बच्ची की मां के मुताबिक, गंभीर बीमारी के कारण उसकी बेटी अधिकांश समय बिस्तर पर ही रहती है। वह अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की तरह चल-फिर और खेल नहीं सकती। यहां तक कि पानी पीने के लिए भी उसे दूसरों की सहायता की जरूरत पड़ती है। मां की इच्छा है कि उसकी बेटी को बेहतर इलाज मिले और वह सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सके।
एम्स से जामा मस्जिद तक पहुंची मदद की मुहिम
बच्ची के इलाज के लिए शुरू हुआ अभियान धीरे-धीरे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों तक पहुंचा। इसके बाद युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने जामा मस्जिद के बाहर भी लोगों से बच्ची के इलाज के लिए सहयोग की अपील की। जुमे की नमाज के बाद बाहर निकल रहे लोगों को बच्ची की बीमारी और इलाज की जरूरत के बारे में जानकारी दी गई।
अभियान से जुड़े लोगों ने बच्ची की तस्वीर और विवरण वाली टी-शर्ट पहनकर लोगों से सहयोग मांगा। ऑनलाइन सहयोग के लिए क्यूआर कोड भी उपलब्ध कराया गया।
अब तक जुटाए गए 6.33 करोड़ रुपये
सोशल मीडिया और लोगों के सहयोग से अभियान को बड़ी प्रतिक्रिया मिली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्ची के इलाज के लिए अब तक करीब 6.33 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, जबकि लक्ष्य करीब 9 करोड़ रुपये से अधिक का बताया गया है। इलाज के लिए जरूरी रकम जुटाने की मुहिम अभी जारी है।
मदद के लिए आगे आए लोग
बच्ची की मदद के लिए अलग-अलग समुदायों और वर्गों के लोग आगे आए। जामा मस्जिद के बाहर भी लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग किया और बच्ची के स्वस्थ होने की दुआ की। सोशल मीडिया पर भी लोगों से लगातार मदद की अपील की जा रही है।
मासूम के इलाज के लिए शुरू हुई यह मुहिम अब बड़े जनसहयोग अभियान का रूप ले चुकी है। 6.33 करोड़ रुपये जुटने के बाद परिवार को इलाज की उम्मीद जगी है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी और आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है।